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मदमस्त मैं

अंज अंग आँखें अंजन हैं ,
मदन की अंगचरी तुम .
अंकुरित यौवन ये तन मन है ,
प्रेम में अंटाचित्त जग तुम ।।

माणिक्य बहुगुना

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