मदमस्त मैं मई 17, 2016 अंज अंग आँखें अंजन हैं , मदन की अंगचरी तुम . अंकुरित यौवन ये तन मन है , प्रेम में अंटाचित्त जग तुम ।। माणिक्य बहुगुना शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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