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।। तुम ।।

रंगे ग़ुलाब सी तुम ...
सपनों का सरताज़ सी तुम ...
मैं यों ही सो जाना चाहता हूँ ..
जब से सपनों में आई हो तुम ....

©®चंद्र प्रकाश बहुगुना / पंकज / माणिक्य

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