मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
मेरे अनुभव एवं इस समाज की स्थिति का वर्णन किया गया है ।
मेरे अनुभव एवं इस समाज की स्थिति का वर्णन किया गया है ।
रंगे ग़ुलाब सी तुम ...
सपनों का सरताज़ सी तुम ...
मैं यों ही सो जाना चाहता हूँ ..
जब से सपनों में आई हो तुम ....
©®चंद्र प्रकाश बहुगुना / पंकज / माणिक्य
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