मेरे अनुभव एवं इस समाज की स्थिति का वर्णन किया गया है ।
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टापर हूँ मैं ।
मैं टापर हूँ बिहार का ..।
देश का भविष्य हूँ ।
चाणक्य हूँ मैं ।
मैं ही बूद्ध हूँ ।
नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..।
मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ ।
टापर हूँ मैं ।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
अगली होली आप लोगों के साथ हो , इसी लिए दूर हूँ । सब को शुभकामनायें , बधाई रंगोत्सव की ... जीवन रंगमय हो सब का , रंग बसन्त सा हो सब का , कुछ हालात हैं हम दूर हैं . वरना पास आ जाता कब का । ...
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