मैं खुद तो उद्गार लिया फिरता हूँ ..
जीवन में फिर भी प्यार लिया फिरता हूँ ।
मैं रमता जोगी हूँ ना घर , ना पैसे .
फिर भी लोगों को प्यार दिया फिरता हूँ ।।
माणिक्य बहुगुना / पंकज / चंद्र प्रकाश
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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