तुम सुन रही हो ना ?
मेरा हृदय मक्खन सा कोमल है ..
थोडा सा प्रेम की आँच से घी बन जाता हूँ ..
और थोडा गुस्से में ठोस पत्थर सा ।
लेकिन मैं पत्थर नहीं हूँ ..
मैं बस दिल से बुरा नहीं हूँ ।
बस गुस्से से लाल हो जाता हूँ कई बार क्योंकि
मुझे हर किसी की फ़िक्र होती है ।
तभी हर बार लोग फायदा भी उठाते हैं ..
मुझे बच्चा बनना पसन्द है ..।
अबोध , राग द्वेष से मुक्त ..
केवल प्रेम , लाड़ से युक्त ।
सुन रही हो ना तुम मैं बुरा नहीं हूँ ..।
थोड़ा बचपना है ..
मैं औरों सा नहीं । केवल अपने लिए सोचूं ..
बस सब के लिए सोचता हूँ ..।
मैं बच्चा हूँ मुझे बच्चा रहने दो ..
अनुरोध है ।
माणिक्य बहुगुना / पंकज / चंद्र प्रकाश
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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