हम जाना चाहते हैं सब छोड़कर फिर इंतज़ार बाकी है ,
चाहे तुम हमसे नफ़रत ही करो पर हमारे तो दिल में प्यार बाकी है ।
दिन तो कट ही जाते है कुछ कामों में चनदर ,
लगता है फिर रातों को दिल का गुबार बाकी है ।
दौड़ भरे जीवन में कट जाते हैं हफ़्ते महीने दो चार ,
फिर लगता है वह छुट्टी वाला इतवार (रविवार) बाकी है ।
जब भी मिलते थे उन के हमारे नयन चार,
हर पल हर क्षण लगता था एतबार बाकी है ।
जब भी प्रेम में हम डूबने लगते हैं ,
फिर लगता है वो क़रार बाकी है ।
जब भी देखता हूँ उस बेवफा को ,
एक पल के लिए लगता है कुछ प्यार बाकी है ।
छोड़ना चाहता हूं इस जग को तुम को ,
फिर लगता है इश्तहार बाकी है ।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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