वैश्वीकरण की होड में ,
कहीं भारत पीछे न छूट जाय ।
विश्फोटकों बमों की होड में,
कहीं मानव अस्तित्व न मिट जाय ।
इतिहास गँवा है इस तोड़ में ,
कहीं फिर हर देश जापान ना बन जाय ।
ग़रीब जनों का पेट काटकर ,
ये विश्फोटक न बनाए जाय ।
अरबों की सम्पत्ति होती नष्ट ,
ये पर्यावरण बचाया जाय ।
तरक्की हितकर है पर
मानव , मानवता बचाई जाय ।
हर वैज्ञानिक का ,
दिमाग़ विश्व कल्याण में लगाया जाय ।
सकल विश्व एक कुटुंब है ,
क्यों ना अपना घर बचाया जाय ।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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