दर्द सहा करो ,
फिर भी हँसा करो ।
ग़म छुपाया करो ,
यों मुस्कुराया करो ।
अपने जीवन का भी ,
मज़ा उठाया करो ।
महल तो रोशनी से जगमगाते सभी ।
कभी झोपड़े में भी दिया जलाया करो ।
अपनों को तो दुख-सुख देते सभी ,
गैरों के दुःख-सुख में मिल जाया करो ।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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