मैं मतवाला , वह मधुबाला ,
पीते हैं मधुप्याला ।
मैं मधुकर सा डोल रहा हूं ,
हर इक बस्ती हर इक सस्ती मधुशाला ।
वह मधुराक्षी पीला रही ,
मैं मयकश सा पी रहा हूं मधुप्याला ।
मैं मदहोशी में घूम रहा हूं ,
मैं महलों वाला भी आज बना हूं बस्तीवाला ।
आज नहीं मैं उस ठेके पे जाने वाला ,
आज नहीं हूं मैं वो धनवाला ।
इल्लत मेरा मुक़द्दर ही था ,
जो जी रहा हूं हर इक प्याला ।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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