मैं मतवाला , वह मधुबाला ,
पीते हैं मधुप्याला ।
मैं मधुकर सा डोल रहा हूं ,
हर इक बस्ती हर इक सस्ती मधुशाला ।
वह मधुराक्षी पीला रही ,
मैं मयकश सा पी रहा हूं मधुप्याला ।
मैं मदहोशी में घूम रहा हूं ,
मैं महलों वाला भी आज बना हूं बस्तीवाला ।
आज नहीं मैं उस ठेके पे जाने वाला ,
आज नहीं हूं मैं वो धनवाला ।
इल्लत मेरा मुक़द्दर ही था ,
जो जी रहा हूं हर इक प्याला ।
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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