सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ये लोग

आज कितने मतलबी हो गए लोग ...,
खुद के स्वार्थ के लिए जान ले रहें हैं लोग ..
जिन्दा रहते-रहते कांटे बोते हैं लोग ...
मर जाने पर पुष्पों की माला लेकर आते हैं लोग ।

सफलता चरण चूमे तो जलते हैं लोग ...
असफलता का मुहँ देखना पड़े तो जलते हैं लोग ...
प्यार में पड़ने पर पागल कहते हैं लोग ..
घ्रणा करने पर जानवर समझते हैं लोग ..।

जिंदगी मौज़ से काटने को बेइमानी कहते हैं लोग ...
धनहीन होने पर भिकारी कहते हैं लोग ...।
जिन्दा रहते - रहते याद नहीं करते लोग ...।
मारने के बाद श्रद्धांजली देने आते हैं लोग ..।

चंद्र प्रकाश बहुगुना /माणिक्य /पंकज

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वर्ण पिरामिड

तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...

होली

अगली होली आप लोगों के साथ हो , इसी लिए दूर हूँ । सब को शुभकामनायें , बधाई रंगोत्सव की ... जीवन रंगमय हो सब का , रंग बसन्त सा हो सब का , कुछ हालात हैं हम दूर हैं . वरना पास आ जाता कब का ।    ...

।। मैं और मेरा भोला पन ।।

लोग चांद तक पहुंच गये .....       मैं बचपन के खिलौनों से खेलता हूं....                              लोग इतने चालाक हो गये कि मत पूछ चन्दर  ....                  मैं अभी भी हालातों के उख...