घनीभूत हृदय में चित्र तुम्हारा बन आया है ..
तभी पानी बन आँखों से आया है ...
और वो तपन अब भी ...
हर महामिलन में बाधा बन आया है ।
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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