शायरी -2 जुलाई 02, 2015 तुम ना आए मिलने , मिलन को आँखें तरस गई । मेरी मजबूरी,लाचारी देख , गगन की आँखें बरस गई ।। शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेबल दिल्ली शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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