तुम ना आए मिलने ,
मिलन को आँखें तरस गई ।
मेरी मजबूरी,लाचारी देख ,
गगन की आँखें बरस गई ।।
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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