मुक्तक जुलाई 04, 2015 दिन का सूरज ढल जाएगा , यादों की रातें आएगी | अपने हृदय पट खोल , तू भी मिलने आ जाएगी || शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेबल दिल्ली शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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