सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शायरी

          ।। शायरी ।।
बस एक तेरे बिन सूना लागे ।।
न रात-रात सोए न दिन हम जागे ,
तेरे बिन ना ये जीया लागे ।।
आँखें सूखी-सूखी दिल गमों से भरने लगा ,
तेरी यादों की बाराती बन सजने लगे ।।
अब इस गली शायद ही चाँद निगले ,
तुम बिन तो चाँद भी फीका सा लागे ।।

टिप्पणियाँ