।। शायरी ।।
बस एक तेरे बिन सूना लागे ।।
न रात-रात सोए न दिन हम जागे ,
तेरे बिन ना ये जीया लागे ।।
आँखें सूखी-सूखी दिल गमों से भरने लगा ,
तेरी यादों की बाराती बन सजने लगे ।।
अब इस गली शायद ही चाँद निगले ,
तुम बिन तो चाँद भी फीका सा लागे ।।
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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