।। शायरी ।।
बस एक तेरे बिन सूना लागे ।।
न रात-रात सोए न दिन हम जागे ,
तेरे बिन ना ये जीया लागे ।।
आँखें सूखी-सूखी दिल गमों से भरने लगा ,
तेरी यादों की बाराती बन सजने लगे ।।
अब इस गली शायद ही चाँद निगले ,
तुम बिन तो चाँद भी फीका सा लागे ।।
तू मुझे जग से प्यारा ही है ना छोड़ के जा मेरी पूजा भी तू माँ जमीं में देवता ।। मैं बिन तेरे हूँ अधूरा सा गम में मारा लगता क्यों सारा बनता हूँ .....बेचारा ।। चंद्रप्रकाश बहुगुणा /म...
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