सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जूही का फूल

नव पल्लव कोमल , ललित लिए ,
झूल रहे थे टहनी पर ..
युवती जूही बिखेर रही थी सुंदरता कुसमों में ,
यौवन का घुमार लूट रहे तितली अली ..
नव दल पर दल-दल कर ले रहे हैं मजा पराग का ,
अन्य कीट पतंग करते दांव पेंच ,
   पाने यौवन के घुमार का ।
भू लोकी मानव भी लेते ..
    मज़ा पराग का ।।

चंद्रप्रकाश बहुगुणा / माणिक्य /पंकज

टिप्पणियाँ