मैं जिस में जीत हूँ मरता हूँ ...
मैं वो बात तुम्हें बताता हूँ ।
तेरे आँखों के अश्कों में जीत हूँ ..
तेरी झील सी आँखों में मरता हूँ ।
लबों की हँसी में मैं ही बसता हूँ ....
तेरे ही दुःख में मरता हूँ ।
तुम्हारे अंतस मन में बसता हूँ ...
तुम्हारी इस पीड़ा में मरता हूँ ।
तुम्हारे गालों की लाली में ..
तुम्हारे सांसों के सांसों में बसता हूँ ।
तुम्हारे रोमों में , नस-नस में...
तुम्हारी धड़कन में मैं ही बसता हूँ ।।
तुम्हारी रातों की नींदों में ...
दिन के कामों में मैं ही बसता हूँ ।
तुम्हारी डर में ,लज्जा में ...
शरमाने में मैं ही बसता हूँ ।
मैं टापर हूँ बिहार का ..। देश का भविष्य हूँ । चाणक्य हूँ मैं । मैं ही बूद्ध हूँ । नये ज्ञान का सृजन हूँ मैं ..। मैं ही ज्ञान -विज्ञान हूँ । टापर हूँ मैं । माणिक्य बहुगुना
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